पहली कृति....

(आज तक कभी कुछ नही लिखा कभी....

लेकिन आज कुछ लिखने को दिल कह रहा है...)

सभी को लिखते देख मेरा मन भी किया कुछ लिखने को...

कागज़ कलम तो उठाया पर शब्द नही थे लिखने को .....

बहुत सोचने के बाद भी कोई टॉपिक न मिला लिखने को,

दिल ने कहा रहने दो कुछ लिखने को....

नही ये सब काम तुम्हारा अब रहने भी दो लिखने को...

एक आवाज़ आई अन्दर से,,,,

मन ने कहा...

हार न मानो,,,

अब शुरू भी करो कुछ लिखने को ....

सोच कविता ये लिख डाली पर मिला नही कुछ लिखने को...

अब सोचा क्या हम भी बन पाएँगे एक कवि...

क्या हमे भी मिलेगा कुछ लिखने को???

दिल ने कहा छोड़ो,, अब रहने भी दो लिखने को...

अब रहने भी दो लिखने को...

अब रहने भी दो लिखने को......

1 Response
  1. Anonymous Says:

    बहुत खूब लिखा है स्वाति जी। ब्लाग जगत में आगमन पर हार्दिक बधाई। भविष्य के लिये शुभकामनायें।